शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

ताजमहल

*ताजमहल*➖मेरी धर्मपत्नी कई बार जिद कर चुकी है कि ➖अजी सुनते हो ,ताजमहल दिखा लाओ , पर मे हर बार टाल जाता था । भला हो युग पुरुष आदित्य नाथ जी का सारा झेमेला ही खत्म कर दिया 😀ना नो मन तैल होगा और ना राधा नाचेगी । अब कह कर दिखाए जरा की ➖अजी ताज महल,लालकिला या कुतुब मीनार ही दिखा लाओ 😀 अब तो कहने के लिए हथियार मिल गया कि *पगली ये सब मुगलो की निशानी है, और ऐसी दासता भरी जगह देखने जाना देश हित मे नही है😀बरहाल लो जी ताजमहल भी यूपी पर्यटन से गायब हो गया। अच्छी बात है हम दासता की निशानी का क्यूं प्रचार करें ? पर एक बात समझ मे नही आई कि हमे तो स्कूल में 15 साल तक ये पढ़ाया गया कि ताजमहल मोहब्बत की निशानी है ,साला अब जाकर पता चला कि ये तो *मुगलो की निशानी है*😀चलो खैर हमारे जमाने के मास्टर सठिया गए होंगे जो गलत सलत पढ़ा दिया😀 अब तो नया युग है ,मेरे विचार से हमे इतिहास की किताबो में बदलाव की जरूरत है , और हमे ये भी चिन्हित करना चाहिए कि आखिर हमारे देश मे दासता की निशानी ,मुगलो की निशानी कौन कौन सी है । मेरा अपना मानना है कि अब वकत आ गया है कि हमे *ताजमहल, बुलन्द दरवाजा,फतेहपुर सीकरी, लालकिला,भुलभुलया,कुतुब मीनार, इंडिया गेट आदि मुगलो और दासता की निशानी को तोड़ फोड़ कर जमींदोज कर देना चाहिए । क्यूंकि ये देशहित में होगा । जय हिंद

गोरेखधंदा

गोरखधंदा➖कई बार मुझ जैसे साधारण आदमी की समझ मे कुछ चीजें हजम नही हो पाती , या तो मै ही मंदबुद्धि हूँ या जानबूझ कर मंदबुद्धि बनाया जा रहा है 😀हर चीज सीधी और सरल दिखाई देती है ,परन्तु अगर थोड़ा सा भी ज्ञान लगाओ तो सब उल्टा पुल्टा ,अब ये छोटा सा उदाहरण ही देख लीजिए जब आप बैंक में एक साल तक के लिए 2000₹ जमा रखते है तब आपको 8% ब्याज के साथ 160₹ मिलते है,
आप बैंक से एक साल के लिए 2000₹ का क़र्ज़ लेते है तब आपको 13% ब्याज की दर से 260₹ देने पड़ते है,😀
पर आप कही 2000₹ का खाना खाते है तो 18% GST के हिसाब से सरकार को 360₹ देते है
है ना कमाल😀 वैसे मेरा अपना मानना ये है कि अगर कलयुग में किसी को देवता की उपाधि से अलंकृत करना हो तो मान्यवर आदरणीय, कुबेर देवता के समान, महान गणितीय हर दिल अजीज *जेठली* जी योग्य महापुरुष है😀मेरी ईश्वर से ये ही कामना है कि हमारे देश का वित्तमंत्री पद सुरछित कर दिया जाए और सरकार चाहे किसी भी पार्टी की आये पर वित्तमंत्री पूजनीय जेठली जी को ही बनाया जाए 😀

रिलायंस

*रिलायंस*➖
कई साल पहले की बात है। देश की एक आला कंपनी ने देशवासियों को कर लो दुनिया मुठ्ठी में का मंत्र दिया था। मंत्र को हमने न केवल स-हृदय स्वीकारा बल्कि स्वागत भी किया। फिर तो देश के प्रत्येक आमो-खास की मुठ्ठी में एक बे-तार का यंत्र नजर आने लगा। आलम यह था- जिस ओर निगाह दौड़ा दो, उस ओर कर लो दुनिया मुठ्ठी में के इश्तिहारों से दीवारें पटी पड़ी रहती थीं😀 बे-तार के उस यंत्र पर हम इस कदर ‘मोहित’ थे कि मोहल्ले के नुक्कड़ और गांव-देहात की चौपाल पर उसी की धुनें और चर्चाएं छाई रहती थीं।

सही मायनों में मोबाइल फोन के प्रति हमारे भीषण आकर्षण या कहें दीवानगी की शुरुआत यहीं से हुई थी।

करो लो दुनिया मुठ्ठी में से शुरू हुआ सफर फिलहाल फ्री-हैंडसेट पर आकर टिका है। लेकिन यह अंत नहीं है। अंत हो भी नहीं सकता क्योंकि इंसान की खोपड़ी हर पल कुछ न कुछ नया और अद्भूत चलता रहता है, और चले भी क्यूँ नही *खाली खोपड़ी शैतान का घर😀। देश में बाकी क्रांतियां का तो नहीं मालूम हां मगर ‘डिजिटल-क्रांति’ बहुत तेजी चल रही है। हर घर का तो छोड़िए हर व्यक्ति के हाथ में एक-दो मोबाइल फोन मिल जाना अब सामान्य-सी बात है।

वैसे तो आज की तारीख में लोगो के काम धन्दे है नही 😀फिर भी अपने काम-धंधों के बाद लोग कहीं और अगर व्यस्त रहते हैं तो अपने-अपने मोबाइल फोनों में ही। टच-स्क्रीन पर ऊंगलियां हर वक्त कुछ न कुछ या तो खोजती रहती हैं या फिर मैसेजिस लिखती रहती हैं। दीवानगी का आलम यह है कि राह चलते हुए भी लोगों ने अब निगाहें ऊपर कर चलना छोड़ दिया है। फेसबुक, टि्वटर, व्हाट्सएप हमारी जिंदगी के वो जरूरी हिस्से बन चुके हैं कि अब अपनों को इग्नोर करते जाना हमारी आदत में शामिल हो गया है। हममें से बहुत लोगों को शायद इसका गम न हो। रिश्तो से पियार मिले या ना मिले पर लाइक जरूर मिलना चाहिए 😀

हाल में, नहले पे दहला जियो ने अपने हैंडसैट को आंशिक फ्री कर दीवानगी का एक औ झुनझुना हमें थमा दिया है। मुफ्त डाटा बांटने की होड़ तो चल ही रही थी कंपनियों के बीच अब शायद मुफ्त के हैंडसेट बांटने का अभियान भी चल निकले😀

जो हो पर ग्राहक सर से लेकर पैर तक फायदे ही फायदे में है। कभी ऐसा समय भी था जब मात्र ‘हैलो’ कहने के ही दस रुपए झट्ट से कट जाया करते थे। अब वो समय है कि लोग एक-दूसरे से घंटों वीडियो चैट कर लेते हैं वो भी बहुत ही मामूली खर्चे में।

दुनिया जितनी तेजी के साथ डिजिटल हो रही है, उतनी ही तेजी से इंसानों के बीच नजदीकियां बिखर रही हैं। महीनों गुजर जाते हैं हमें एक-दूसरे से मिले या शक्लें देखे हुए। तो क्या...। मुफ्त का हैंडसेट और पर-डे वन जीबी डेटा है न दूरियों को नजदीकियों में बदलने के लिए!