*ताजमहल*➖मेरी धर्मपत्नी कई बार जिद कर चुकी है कि ➖अजी सुनते हो ,ताजमहल दिखा लाओ , पर मे हर बार टाल जाता था । भला हो युग पुरुष आदित्य नाथ जी का सारा झेमेला ही खत्म कर दिया 😀ना नो मन तैल होगा और ना राधा नाचेगी । अब कह कर दिखाए जरा की ➖अजी ताज महल,लालकिला या कुतुब मीनार ही दिखा लाओ 😀 अब तो कहने के लिए हथियार मिल गया कि *पगली ये सब मुगलो की निशानी है, और ऐसी दासता भरी जगह देखने जाना देश हित मे नही है😀बरहाल लो जी ताजमहल भी यूपी पर्यटन से गायब हो गया। अच्छी बात है हम दासता की निशानी का क्यूं प्रचार करें ? पर एक बात समझ मे नही आई कि हमे तो स्कूल में 15 साल तक ये पढ़ाया गया कि ताजमहल मोहब्बत की निशानी है ,साला अब जाकर पता चला कि ये तो *मुगलो की निशानी है*😀चलो खैर हमारे जमाने के मास्टर सठिया गए होंगे जो गलत सलत पढ़ा दिया😀 अब तो नया युग है ,मेरे विचार से हमे इतिहास की किताबो में बदलाव की जरूरत है , और हमे ये भी चिन्हित करना चाहिए कि आखिर हमारे देश मे दासता की निशानी ,मुगलो की निशानी कौन कौन सी है । मेरा अपना मानना है कि अब वकत आ गया है कि हमे *ताजमहल, बुलन्द दरवाजा,फतेहपुर सीकरी, लालकिला,भुलभुलया,कुतुब मीनार, इंडिया गेट आदि मुगलो और दासता की निशानी को तोड़ फोड़ कर जमींदोज कर देना चाहिए । क्यूंकि ये देशहित में होगा । जय हिंद
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें