तलाक तलाक तलाक ➖ लो साहब एक और पुरानी रिवायत तोड़ दी गयी, अब आप अपनी सगी बीवी को तीन तलाक नही दे सकते । हम मर्दो के पास बीवी को धमकाने ,और उनकी मेरठ की केंची की तराह तेज चलती जुबान पर रोक लगाने का एक ही जन्मसिद्ध अधिकार था ,वो भी गया हाथ से 😀 पहले कभी बीवी लड़ती थी तो उसे शांत करने के लिए बोल दिया करते थे ➖चुप हो जा वरना तलाक दे दूंगा😀 और वो भी शेरनी से पालतू गाय बन जाती थी 😀 अब हम निरीह मर्दो के पास एक ही हथ्यार था उसे भी कुंद कर दिया गया । मेरी सभी दोस्तों को सलाह है कि वो अपनी पत्नी का पूर्ण आदर करें 😀 उसकी हर जायज नाजायज डिमांड को पूरी करने में जी जान से जुट जाएं , और चाहे वो काली कलूटी हो पर उसकी तुलना जन्नत की हूर से करें 😀 लेकिन एक बात अब तक समझ मे नही आई जो लोग तलाक खत्म कराना चाहते थे उनमें कोई भी शादीशुदा नही है 😀 भाई आप कुंवारे हो आपको क्या पता शादीशुदा जिंदगी में असली पीड़ित कौन होता है 😀 किस पर जुल्म होता है और कौन मजलूम होता है 😀 अब गिला भी किस से करे जब मर्द ही मर्द का दुश्मन बन जाये तो क्या कर सकते है😃 योगी जी मोदी जी नोटबन्दी , मीटबन्दी, gst का सितम कम था जो एक और नर उत्पीड़न लागू कर दिया ।
शुक्रवार, 29 सितंबर 2017
स्त्री
समाज को हम किस ओर लिए जा रहे हैं यह हमें भी नहीं मालूम। बस चले जा रहे हैं। एक होड़ या कहूं एक जिद-सी है हमारे भीतर एक-दूसरे को ‘मात’ दे आगे निकल जाने की। आगे निकल जाने की यह घुड़-दौड़ हमसे कितना कुछ छीनती जा रही है, शायद हमें इसका अहसास भी नहीं। अगर अहसास हो तो भी हम उसे ‘महसूस’ नहीं करना चाहते।
हमारा समाज निरंतर ‘हिंसक’ और ‘वहशी’ बनते जाने को ‘अभिशप्त’ है। किसी का किसी को कोई ‘लिहाज’ नहीं। मन और शरीर के भीतर दबी कुंठाएं इस कदर बढ़ गई हैं कि उन्हें किसी भी तरह बाहर निकालना है। ऐसे कुंठित लोग यह भी नहीं देखते कि वे दैहिक शोषण स्त्री का कर रहे हैं या मासूम बच्चों का। खासकर, स्त्रियों के साथ शारीरिक, समाजिक, पारिवारिक शोषण की घटनाएं इतनी तादाद में सामने आने लगी हैं, कभी-कभी ऐसी खबरों को पढ़ और जानकर डर-सा लगता है। लगभग यही हाल हमारे मासूम बच्चों का भी है। बच्चों के प्रति शारीरिक दुराचार के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उनके भविष्य की चिंता सताने लगी है। जिन बच्चों में अपने कल व देश के सुनहरे भविष्य की उम्मीदें हम पालते हैं, उन्हीं का शोषण कर पौधे को बड़ा होने से पहले ही काटने पर तुले हैं हम।
हाल में गुरुग्राम के एक बड़े स्कूल में एक मासूम के साथ घटी दैहिक शोषण की घटना क्या हमारे कान नहीं खोलती? हेल्पर ने मासूम बच्चे का गला रेत डाला। दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे की उम्र ही कितनी होती है। उस मासूम को तो कुछ मालूम भी न होगा कि उसके साथ कितना ‘वहशी बर्ताब’ किया गया। फूल को खिलने से पहले ही उसे बेरहमी से तोड़ डाला गया। उक्त खबर पढ़कर ही हम भीतर से कितना हिल गए होंगे। लेकिन पूछिए जरा उस मासूम के मां-बाप से उनके दिलों पर क्या गुजरी होगी? उन्हें जीवन में मिला यह एक ऐसा ‘घाव’ है, जिसे अच्छे से अच्छा ‘मल्लम’ भी नहीं भर सकता। बेटे के न रहने के दर्द ने उनके पूरे जीवन का सुख-चैन छीन लिया।
ये कैसे यौन कुंठाओं से पीड़ित दरिंदे हैं, जिन्हें यह तक होश नहीं रहता कि वे मासूमों के साथ क्या गलत कर रहे हैं। यौन कुंठाओं की चरस का नशा उनके दिमाग पर कुछ तरह तारी रहता है कि वे यह भूल जाते हैं उनका किया कुकर्म किसी मासूम को हमेशा के लिए अंधेरे कुंए में भटकने को मजबूर कर सकता है। उन्हें अपनी ही आत्महत्या के लिए उकसा सकता है। उनसे उनकी सांसे छीन सकता है।
शायद ही ऐसा कोई दिन गुजरता हो जब हमारे समक्ष मासूम बच्चों के साथ यौन या मानसिक शोषण की खबरें न आती हों। अखबार या सोशल मीडिया पर आने वाली हर दूसरी खबर किसी न किसी बच्चे के देह-शोषण से जुड़ी होती है।
न केवल बाहर अपने घर-परिवार में भी बच्चे गाहे-बगाहे ऐसी घटनाओं से दो-चार होते रहते हैं। पता चलता है कि उनके ही परिवार के करीबी सदस्य उनका यौन तिरस्कार करते रहे। समाज में जाने कितनी ऐसी मासूम बच्चियां हैं जो अपने पिता, अपने भाई, अपने मामा-चाचा की गलत हरकतों का शिकार हो चुकी हैं। कुछ तो परिवार वालों के खौफ के चलते मुंह भी नहीं खोल पातीं।
पाप के इस खेल में कोई एक नहीं बल्कि जिम्मेदार हम सब हैं। वजहें बेशक अलग-अलग हो सकती हैं। धीरे-धीरे कर हम एक ऐसा समाज बनते जा रहे हैं जहां यौन कुंठाएं इस कदर हमारे दिलो-दिमाग पर हावी होती जा हैं कि हम इसके अतिरिक्त न कुछ देखना चाहते हैं न समझना। पता नहीं हमारे जिस्म की यह कैसी भूख है, जो बड़ी ही बेरहमी और बेशर्मी के साथ मासूमों को अपना निवाला बनाने से नहीं रोक पा रही।
पैसे, नौकरी और सोशल मीडिया की भेड़चाल में लिप्त मां-बापों के पास समय ही नहीं अपने बच्चों के साथ बीताने को। उसका खामियाजा किसी न किसी रूप में हमारे बच्चों को झेलना पड़ रहा है। दुख होता है, अपने मासूम बच्चों को यों किसी वहशी की यौनिकता का शिकार होता देख।
ऐसे यौन पिपासुओं के विरूद्ध इतने सख्त कानून बनाएं जाएं कि वे तो क्या कोई भी मासूम बच्चों या स्त्रियों के साथ गलत हरकत करने की सोच तक नहीं। पता नहीं वो दिन कब आएगा?
हमारा समाज निरंतर ‘हिंसक’ और ‘वहशी’ बनते जाने को ‘अभिशप्त’ है। किसी का किसी को कोई ‘लिहाज’ नहीं। मन और शरीर के भीतर दबी कुंठाएं इस कदर बढ़ गई हैं कि उन्हें किसी भी तरह बाहर निकालना है। ऐसे कुंठित लोग यह भी नहीं देखते कि वे दैहिक शोषण स्त्री का कर रहे हैं या मासूम बच्चों का। खासकर, स्त्रियों के साथ शारीरिक, समाजिक, पारिवारिक शोषण की घटनाएं इतनी तादाद में सामने आने लगी हैं, कभी-कभी ऐसी खबरों को पढ़ और जानकर डर-सा लगता है। लगभग यही हाल हमारे मासूम बच्चों का भी है। बच्चों के प्रति शारीरिक दुराचार के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उनके भविष्य की चिंता सताने लगी है। जिन बच्चों में अपने कल व देश के सुनहरे भविष्य की उम्मीदें हम पालते हैं, उन्हीं का शोषण कर पौधे को बड़ा होने से पहले ही काटने पर तुले हैं हम।
हाल में गुरुग्राम के एक बड़े स्कूल में एक मासूम के साथ घटी दैहिक शोषण की घटना क्या हमारे कान नहीं खोलती? हेल्पर ने मासूम बच्चे का गला रेत डाला। दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे की उम्र ही कितनी होती है। उस मासूम को तो कुछ मालूम भी न होगा कि उसके साथ कितना ‘वहशी बर्ताब’ किया गया। फूल को खिलने से पहले ही उसे बेरहमी से तोड़ डाला गया। उक्त खबर पढ़कर ही हम भीतर से कितना हिल गए होंगे। लेकिन पूछिए जरा उस मासूम के मां-बाप से उनके दिलों पर क्या गुजरी होगी? उन्हें जीवन में मिला यह एक ऐसा ‘घाव’ है, जिसे अच्छे से अच्छा ‘मल्लम’ भी नहीं भर सकता। बेटे के न रहने के दर्द ने उनके पूरे जीवन का सुख-चैन छीन लिया।
ये कैसे यौन कुंठाओं से पीड़ित दरिंदे हैं, जिन्हें यह तक होश नहीं रहता कि वे मासूमों के साथ क्या गलत कर रहे हैं। यौन कुंठाओं की चरस का नशा उनके दिमाग पर कुछ तरह तारी रहता है कि वे यह भूल जाते हैं उनका किया कुकर्म किसी मासूम को हमेशा के लिए अंधेरे कुंए में भटकने को मजबूर कर सकता है। उन्हें अपनी ही आत्महत्या के लिए उकसा सकता है। उनसे उनकी सांसे छीन सकता है।
शायद ही ऐसा कोई दिन गुजरता हो जब हमारे समक्ष मासूम बच्चों के साथ यौन या मानसिक शोषण की खबरें न आती हों। अखबार या सोशल मीडिया पर आने वाली हर दूसरी खबर किसी न किसी बच्चे के देह-शोषण से जुड़ी होती है।
न केवल बाहर अपने घर-परिवार में भी बच्चे गाहे-बगाहे ऐसी घटनाओं से दो-चार होते रहते हैं। पता चलता है कि उनके ही परिवार के करीबी सदस्य उनका यौन तिरस्कार करते रहे। समाज में जाने कितनी ऐसी मासूम बच्चियां हैं जो अपने पिता, अपने भाई, अपने मामा-चाचा की गलत हरकतों का शिकार हो चुकी हैं। कुछ तो परिवार वालों के खौफ के चलते मुंह भी नहीं खोल पातीं।
पाप के इस खेल में कोई एक नहीं बल्कि जिम्मेदार हम सब हैं। वजहें बेशक अलग-अलग हो सकती हैं। धीरे-धीरे कर हम एक ऐसा समाज बनते जा रहे हैं जहां यौन कुंठाएं इस कदर हमारे दिलो-दिमाग पर हावी होती जा हैं कि हम इसके अतिरिक्त न कुछ देखना चाहते हैं न समझना। पता नहीं हमारे जिस्म की यह कैसी भूख है, जो बड़ी ही बेरहमी और बेशर्मी के साथ मासूमों को अपना निवाला बनाने से नहीं रोक पा रही।
पैसे, नौकरी और सोशल मीडिया की भेड़चाल में लिप्त मां-बापों के पास समय ही नहीं अपने बच्चों के साथ बीताने को। उसका खामियाजा किसी न किसी रूप में हमारे बच्चों को झेलना पड़ रहा है। दुख होता है, अपने मासूम बच्चों को यों किसी वहशी की यौनिकता का शिकार होता देख।
ऐसे यौन पिपासुओं के विरूद्ध इतने सख्त कानून बनाएं जाएं कि वे तो क्या कोई भी मासूम बच्चों या स्त्रियों के साथ गलत हरकत करने की सोच तक नहीं। पता नहीं वो दिन कब आएगा?
किसानों का कर्जा माफ
*किसानों का कर्जा माफ*➖➖ इसे कहते है *जैसी कथनी वैसी करनी* कौन कहता है जुमलेबाज़ों की सरकार है❓मेरे सामने तो लाओ😀 प्रधान सेवक ने एलान किया किसानों का कर्ज माफ होगा , लो जी कर दिया कर्ज माफ ❗विरोधी अब भी कलेजा पीट रहे है ,खामिया निकाल रहे है , उन बड़बुको को कौन समझाए कि *भाई कर्जे माफी की बात हुवी थी , रकम की नही के कितना माफ करेंगे*😀 9 पैसे से लेकर 377 रुपये तक कि भारी भरकम राशि माफ की है 😀 *उम्मीद है के अब किसान आत्महत्या नही करेंगे*😀 जैसी दरियादिली हमने किसानों के साथ दिखाई है , वादा करते है आपसे हर छेत्र में ऐसी ही दरियादिली आपको आने वाले समय मे देखने को मिलेगी ।भाइयो और बहनों आप लोगो को विकास की आंधी दिखाई नही दे रही क्या ❓ मित्रो पेट्रोल 60 रुपये लीटर था हमने आपके सहयोग से आज 80 रुपये लीटर कर दिया 😀 गैस का सिलेंडर 448 रुपये का था ,अब 777 रुपये का है , क्या ये विकास कम है ,और कितना विकास करें 😀 टमाटर 150 किलो बिकवा दिया अब मित्रो आप ही बताओ और कितना विकास करें 😀आशु मलिक
मोदी जी
मोदी जी➖ मे अक्सर जब भी व्यंग लिखता हूँ ना जाने मोदी जी बीच मे कहाँ से आ जाते है ,बात नोट की हो या वोट की, डीजल की हो या पेट्रोल की , देश की हो या धर्म की ,ना जाने ये बन्दा खुद बे खुद बिन बुलाए चला आता है । *आजतक एक बात समझ मे नही आई भाई पूरे 5 साल के लिए जनादेश मिला है ,अखण्ड बहुमत वाली सरकार है ,फिर ये बन्दा फिरकी क्यूँ लेता है ? क्यूं ये बन्दा अपने ही लोगो को नाराज करता है ? क्यूं ये बन्दा अपने ही परंपरागत वोटरों को दुखी करता है ? क्यूँ ये बन्दा अडिग और मजबूत फैसले लेता है ?*
: क्यूँ देश मे बदलाव लाना चाहता है ? क्यूँ बरसो से चली आ रही व्यवस्था को बदलना चाहता है ? क्यूँ हमे डिजिटल इंडिया के सपने दिखाता है ? क्यूँ हर चीज पर टैक्स लगा कर सरकारी खजाना भरना चाहता है ? क्यूँ देशवासियो को बुलेट ट्रेन देना चाहता है ? *भाई 5 साल भौत होते है खुद भी मलाई खाते और दूसरों को भी खिलाते😀 और वो ही घिसे पिटे तरीके से सरकार चला लेते 😀 क्या जेरूरत थी गृहणियों और व्यपारियो को नाराज करने की ,सब की हां में हाँ मिला कर भी तो चल सकते थे 😀डॉक्टर ने तो बताया नही था कि बदलाव लाओ*😀 बरहाल मोदी जी जन्मदिन मुबारक हो 🌹 नोट➖ मे कोई अंध भक्त या अन्धविरोधी नही हूँ , कुछ सवाल थे दिमाग तो यूँ ही पूछ लिया 😀 आशु मलिक
: क्यूँ देश मे बदलाव लाना चाहता है ? क्यूँ बरसो से चली आ रही व्यवस्था को बदलना चाहता है ? क्यूँ हमे डिजिटल इंडिया के सपने दिखाता है ? क्यूँ हर चीज पर टैक्स लगा कर सरकारी खजाना भरना चाहता है ? क्यूँ देशवासियो को बुलेट ट्रेन देना चाहता है ? *भाई 5 साल भौत होते है खुद भी मलाई खाते और दूसरों को भी खिलाते😀 और वो ही घिसे पिटे तरीके से सरकार चला लेते 😀 क्या जेरूरत थी गृहणियों और व्यपारियो को नाराज करने की ,सब की हां में हाँ मिला कर भी तो चल सकते थे 😀डॉक्टर ने तो बताया नही था कि बदलाव लाओ*😀 बरहाल मोदी जी जन्मदिन मुबारक हो 🌹 नोट➖ मे कोई अंध भक्त या अन्धविरोधी नही हूँ , कुछ सवाल थे दिमाग तो यूँ ही पूछ लिया 😀 आशु मलिक
घर का भेदी लंका ढाए
*घर का भेदी लंका ढाये*➖ भाइयो और बहनों ,आप किसी के बहकावे में मत आना । मे वादा करता हूँ विकास जरूर आएगा ,अगर ना आये तो किसी भी चौराहे पर मुझे उल्टा लटका देना । हमारे विरोधी गंदी चाल चल रहे है , सोसल मीडिया को दुष्प्रचार का माध्यम बनाया जा रहा है ,। *मित्रो* देशहित में आप कोई सवाल मत पूछो वरना विकास की गति धीमी पड़ जाएगी । जीडीपी गिरती है तो गिरने दो गाय माता तो सुरछित है कि नही ? किसान मरता है तो मर जाने दो , उसका हल टूटता है तो टूट जाने दो,अपना अम्बानी बुलेट ट्रेन चला देगा ।व्यापारी भूखा मरता है तो मर जाने दो ,विस्वास करो अपना जेठली सब ठीक कर देगा । दोस्तो आप की नोकरी जाती है तो जाने दो , हम आपको गोरक्षक की जॉब दिला देंगे । धरना प्रदर्शन करना 56 इंची सीने वालो का काम है ,अब मित्रो अगर इस काम को औरते भी करने लगी तो अंजाम तो वो ही होगा जो अभी हुवा है , इस प्रकरण से ये बात तो सही साबित होती है कि कानून कोई भेदभाव नही रखता और कानून व्यवस्था चाक चौबंद है । मित्रो: किसी ने हमारे पूर्व वित्तमंत्री यसवंत सिंह के ऊपर काला जादू टोना करा दिया है ,आप से मेरी विनती है कि उस की बातों को गम्भीरता से ना लें क्यूंकि उसकी बातें देशहित में नही है , आपको सिर्फ मेरी और जेठली जी की मन की बात सुननी है, क्यूंकि हम लोगो ने ही आपका कायापलट करना है,मेरे देश वासियो युग बदल रहा है ,अब तक आप लोगो ने महसूस भी कर लिया होगा के वाकई देश बदल रहा है ,अगर कहीं नही बदला है तो वादा करता हूँ आपसे पूरा बदल कर रख दूंगा😀आशु मलिक
मंगलवार, 26 सितंबर 2017
लीजेंड ऑफ दी ठग
*लीजेंड ऑफ दी ठग*➖ आमिर खान की आने वाली फिल्म का ये नाम मुझे भौत अच्छा लगा । ठग वर्ड आते ही दिमाग मे तेजतर्रार और दूसरों का दिल जीतने वाले व्यक्ति की छवि दिमाग मे बन जाती है । ठग लोगो को ठगने में इसलिए कामयाब हो जाता है ,क्यूंकि हम भारतीयों लोगो को लालच और विश्वास जल्द हो जाता है । अब अंग्रेजो को ही देख लो ,आये थे व्यापारी बन कर और बन बैठे हमारे हुक्मरान 😀 मुगलो को ही देख लो आये थे लूटने और हम उनको हुक्मरान बना बैठे 😀 जितने भी महान ठग हुवे है वो दूरदर्शी, वाक्पटुता में निपुण , और लोगो को विस्वाश दिलाने में सफल हुए है । आजकल फिर भारतवर्ष में एक क्रांति आई हुवी है 😀 हर व्यक्ति आशावान है , हर किसी को उम्मीद है कि जल्द ही सब ठीक होगा 😀 चारो तरफ रामराज होगा 😀 विकास जरूर आएगा , देश की हर सीमा सुरछित होगी , हर हाथ को काम मिलेगा, हर किसान को फसल का पूरा दाम मिलेगा, हर लड़की को बोलने की आजादी होगी , किसी स्त्री पर लाठीचार्ज बिल्कुल नही होगा , किसी व्यापारी का उत्पीड़न बिल्कुल नही होगा , *काश ये सब सच हो जाये ,बस डर एक ही है मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखाने वाला महाठग कहीं थैला उठा कर कहीं चला ना जाये*
बुधवार, 6 सितंबर 2017
आतंकवादी
*आतंकवादी*➖जब से होश संभाला तब से ही आतंकवादियो के बारे में सुनता आ रहा हूँ । मेरे मन मे एक धारणा सी बन गयी थी की आतंकवादी कोई राक्षस टाइप का आदमी होगा ,जिसकी शक्ल भयानक होगी, खूंखार दरिंदा नुमा होगा । पर जब tv पर आतंकवादियो के चेहरे मोहरे को देखा तो मुझे नही लगा के ये हम आदमियो से अलग है । कहीं भी कोई बम विस्फोट होता है, बेकसूरों, निहत्थों ,को मारा जाता है तो हम आतंकवादियो के इस घिनोने कृत्य की घनघोर निंदा करते है, और कड़े कदम उठाए जाएंगे का आस्वासन देकर अपनी जिमेदारी से पल्ला झाड़ लेते है , और फिर वो ही कड़ी निंदा को अगला हमला होने तक संभाल कर रख लेते है कि फिर भर्त्सना करने के काम आएगी । कभी फुरसत के लम्हो में आशिक माशूक की दुनिया से अलग हटकर भी सोचा है कि *आखिर ये आतंकवादी बनते क्यूं है? क्या इनका परिवार नही होता? क्यूं जान देना चाहते है और क्यूँ जान लेना चाहते है*❓भई कोई भी बन्दा कितना ही जलीलो खार क्यूँ ना हो ,कितना ही हरामी क्यूं ना हो ,पैसे के लालच में दुसरो की जान लेने को तो राज़ी हो जाएगा परन्तु अपनी जान देने पर कन्नी काट जाएगा क्यूंकि जान है तो जहान है। समझने को तो भौत से उदारण है पर हम बात करते है म्यामांर की हालिया घटना की सारा विश्व समुदाय देख रहा है किस प्रकार शांति के दूत किस प्रकार मुसलमानों की हत्याएं कर रहे है । अब कल्पना कीजिये कि एक परिवार में 6 सदस्यों का शरीफ और खुशहाल परिवार है, और एक दिन उस परिवार के माता पिता भाई बहन और पत्नी को बिना किसी कसूर के निर्दयता के साथ मौत के घाट उतार दिया जाता है ,केवल एक व्यक्ति ही बाकी बचता है । आप उम्मीद करेंगे कि अब उसके जीवन मे उसका टारगेट फिर से मकान बनाना या व्यापार चलाना या जीवन को दुबारा खुशहाल बनाना होगा । निसंदेह आप का जवाब नही होगा । क्यूंकि किसी भी काम में किर्या की प्रतिकिर्या जरूर होती है, आक्रोश को कब तक दबाया जा सकता है । इस लेख का मतलब आतंकवादियो के प्रति हमदर्दी नही है बस एक संदेश है कि मर्ज का कठोर से कठोर इलाज करो परन्तु रोग की जड़ पर वार करो, कोसिस करो के ऐसे हालात ही पैदा ना हो। मारने वाले से बचाने वाले हर धर्म मे बड़ा होता है ,आशु मलिक
रविवार, 3 सितंबर 2017
धर्मपत्नी
*धर्मपत्नी*➖ आदिमानव के युग से ही स्त्री पुरषो के लिए कोतुहल और जिज्ञासा का विषय रही है , किसी ने उसमे चांद देखा तो किसी को स्त्री में हूर नज़र आई, किसी किसी ने मोहब्बत का आईना कहा ,तो किसी ने इबादत का खुदा तक कह डाला 😀 किसी ने कयामत कहा तो ,किसी ने हुस्न के देवी कहा । पर अफसोस किसी ने भी पुरुष के लिए कुछ नही कहा 😀 अगर खुदा ना खास्ता किसी के नसीब से बिल्ली वाला छींका टूट गया और एक साधारण आदमी को खूबसूरत बीवी मिल भी गयी तो कहने वालों ने ये तो कहा➖ हूर के बगल में लँगूर पर आज तक किसी ने ये नही कहा कि ➖ *वो देखो हुरा के बगल में लंगुरिया जा रही है*😀 अरे भाई ऐसा भेद भाव क्यूँ ❓इसका नतीजा ये निकला कि सदियों से शोषित बेचारा और मजलूंम पुरुष ने डिजिटल क्रांति आने पर अपनी सारी भड़ास व्हाट्सएप और फेसबुक पर स्त्रीओ की बुराई करने में लगा दी 😀 अब हर तीसरा शादीशुदा आदमी दूसरे आदमी को जोक या हंसी ठिठोली के रूप में पत्नी की बुराई एक दूसरे को भेजता रहता है 😀*मानो तस्सली दे रहा हो कि भाई फिक्र मत कर जो तेरा हाल है ,वो ही मेरा हाल है*😀 इस मामले में अपने मुख्यमंत्री और आलौकिक महापुरुष योगी जी और वाक्पटुता में निपुण, पूरे संसार का भृमण करने वाले महापुरुष मोदी जी से ईर्ष्या रखता हूँ 😀 बंदों ने मिशाल ही खत्म कर दी कि हर सफल पुरुष के पीछे एक स्त्री का हाथ होता है 😀 दोनों महापुरषो की लाइफ बिंदास कोई पूछने वाला नही कोई टोकने वाला नही 😀 चाहे मध्यरात्रि को नोट बंद कर दो,चाहे अस्पतालों को ऑक्सीजेंन मत दो , चाहे सब व्यपारियो को चोर बोल दो ,मजाल है जो कोई पूछ लें कि ➖ऐं जी ऐसे कैसे कर सकते हो 😀 अब मेरा क्या होगा 😀
शनिवार, 2 सितंबर 2017
ईद मुबारक
सभी साथियो को *ईद उल अज़हा* की मुबारकबाद 🌹🌹 दोस्तो ये ईद का पर्व मुस्लिमो के लिए अहम है । ये पर्व गोस्त खाने या खिलाने का पर्व नही है , इसके पीछे है धार्मिक आस्था और बलिदान का अनूठा मिश्रण है। हज़रत इब्राहीम अलेहसलाम को परम पिता परमेश्वर का जब हुकुम हुवा के अपने पुत्र की कुर्बानी दो। तो इब्राहिम अलेहसलाम अपने उस खुदा के हुक्म के मुताबिक अपने पुत्र की कुर्बानी देने को तैयार हो गए। लेकिन खुदा तो सिर्फ दिल को देखता है , खुदा ने उनकी नियत और दिल को देखा और उनके पुत्र की जगह एक मेंढे को लिटा दिया, इस प्रकार कुर्बानी का प्रचलन समाज मे आया । पूरे साल में आप कितने भी जानवर काटो या खाओ लेकिन वो कुर्बानी नही होगी। कुर्बानी सिर्फ साल में एक बार ईद उल अज़हा के तीन दिन में ही होगी।ये ईद स्पष्ठ संकेत देती है कि सर्वशक्तिमान ईश्वर की रजा के लिए उसका हर बन्दा किसी भी प्रकार के त्याग बलिदान के लिए तैयार है।
दोस्तो कुर्बानी के गोस्त को अमीर व्यक्तिओ या जिनके यहां कुर्बानी हुवी है , वहाँ ना देकर ऐसे लोगो को बांटे जो गरीब हो, जिनके यहां कुर्बानी नही हुई है , और जो हर लिहाज से इसके हक़दार है । अपने माँ बाप ,छोटे भाई बहनों, रिस्तेदारो ,यार दोस्तो से पुरखलुश अंदाज से पेश आये । एक छोटी सी इल्तजा है कि *कुर्बानी का वीडियो या फ़ोटो ना बनाये और न ही किसी मीडिया में पोस्ट करें,क्यूंकि ये सामाजिक और धार्मिक दोनों लिहाज से गलत और गैर शरीयत है*🙏
दोस्तो कुर्बानी के गोस्त को अमीर व्यक्तिओ या जिनके यहां कुर्बानी हुवी है , वहाँ ना देकर ऐसे लोगो को बांटे जो गरीब हो, जिनके यहां कुर्बानी नही हुई है , और जो हर लिहाज से इसके हक़दार है । अपने माँ बाप ,छोटे भाई बहनों, रिस्तेदारो ,यार दोस्तो से पुरखलुश अंदाज से पेश आये । एक छोटी सी इल्तजा है कि *कुर्बानी का वीडियो या फ़ोटो ना बनाये और न ही किसी मीडिया में पोस्ट करें,क्यूंकि ये सामाजिक और धार्मिक दोनों लिहाज से गलत और गैर शरीयत है*🙏
सदस्यता लें
संदेश (Atom)