मंगलवार, 13 मार्च 2018

अजान और मोदी जी

अजान और मोदी जी➖अभी चंद रोज पहले एक सोनू निगम गेवये ने अज़ान पर ऐतराज उठाया था,उसे अजान से दिक्कत होती थी, पूरे हिदुस्तान के मुस्लिमो ने और हिन्दू समाज के बुद्धिजीवी लोगो ने इसकी घनघोर निंदा करी और प्रचार पाने का सस्ता हथकंडा बताया । लेकिन कल देश के प्रधन्मन्त्री ने अपनी रैली में अज़ान की आवाज सुनकर अपना भाषण रोक दिया,क्यूंकि वो साफ संदेश देना चाहते थे कि ईश्वर के घर से निकली आवाज चाहे वो किसी भी धर्म की हो ,हमेशा कर्णप्रिय होती है ,हमेशा सकून और शांति देती है । साथ ही एक संदेश ये भी था कि सबका साथ सबका विकास । यहां मै एक बात पूछना चाहूंगा कि जब सोनू निगम की लाखों लोग निंदा कर सकते है तो मोदी जी की मुक्त कंठ से प्रशंसा क्यूँ नही ❓या बस हर चीज की बुराई करनी है, वो सूट कितने का पहनता है😀 कहाँ जा रहा है,कहाँ से आ रहा है😀क्या खाता है ,कितने का खाता है😀 दोस्तो राजनीति में कोई सगा नही होता,राजनीति में कोई दूध का धुला भी नही होता, हमाम में नंगे सभी होते है ,कुछ ज्यादा कुछ थोड़े 😀 पर अगर कोई व्यक्ति मिशाल वाला कार्य करे तो उसकी प्रशंसा और उसका हौसला बढ़ाना जरूरी होता है । मान्यवर मोदी जी हम आपके इस कदम की भूरि भूरि प्रशंसा करते है और आशा करते है कि आप एक नई परम्परा और नए हिंदुस्तान का निर्माण करें🙏

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

ताजमहल

*ताजमहल*➖मेरी धर्मपत्नी कई बार जिद कर चुकी है कि ➖अजी सुनते हो ,ताजमहल दिखा लाओ , पर मे हर बार टाल जाता था । भला हो युग पुरुष आदित्य नाथ जी का सारा झेमेला ही खत्म कर दिया 😀ना नो मन तैल होगा और ना राधा नाचेगी । अब कह कर दिखाए जरा की ➖अजी ताज महल,लालकिला या कुतुब मीनार ही दिखा लाओ 😀 अब तो कहने के लिए हथियार मिल गया कि *पगली ये सब मुगलो की निशानी है, और ऐसी दासता भरी जगह देखने जाना देश हित मे नही है😀बरहाल लो जी ताजमहल भी यूपी पर्यटन से गायब हो गया। अच्छी बात है हम दासता की निशानी का क्यूं प्रचार करें ? पर एक बात समझ मे नही आई कि हमे तो स्कूल में 15 साल तक ये पढ़ाया गया कि ताजमहल मोहब्बत की निशानी है ,साला अब जाकर पता चला कि ये तो *मुगलो की निशानी है*😀चलो खैर हमारे जमाने के मास्टर सठिया गए होंगे जो गलत सलत पढ़ा दिया😀 अब तो नया युग है ,मेरे विचार से हमे इतिहास की किताबो में बदलाव की जरूरत है , और हमे ये भी चिन्हित करना चाहिए कि आखिर हमारे देश मे दासता की निशानी ,मुगलो की निशानी कौन कौन सी है । मेरा अपना मानना है कि अब वकत आ गया है कि हमे *ताजमहल, बुलन्द दरवाजा,फतेहपुर सीकरी, लालकिला,भुलभुलया,कुतुब मीनार, इंडिया गेट आदि मुगलो और दासता की निशानी को तोड़ फोड़ कर जमींदोज कर देना चाहिए । क्यूंकि ये देशहित में होगा । जय हिंद

गोरेखधंदा

गोरखधंदा➖कई बार मुझ जैसे साधारण आदमी की समझ मे कुछ चीजें हजम नही हो पाती , या तो मै ही मंदबुद्धि हूँ या जानबूझ कर मंदबुद्धि बनाया जा रहा है 😀हर चीज सीधी और सरल दिखाई देती है ,परन्तु अगर थोड़ा सा भी ज्ञान लगाओ तो सब उल्टा पुल्टा ,अब ये छोटा सा उदाहरण ही देख लीजिए जब आप बैंक में एक साल तक के लिए 2000₹ जमा रखते है तब आपको 8% ब्याज के साथ 160₹ मिलते है,
आप बैंक से एक साल के लिए 2000₹ का क़र्ज़ लेते है तब आपको 13% ब्याज की दर से 260₹ देने पड़ते है,😀
पर आप कही 2000₹ का खाना खाते है तो 18% GST के हिसाब से सरकार को 360₹ देते है
है ना कमाल😀 वैसे मेरा अपना मानना ये है कि अगर कलयुग में किसी को देवता की उपाधि से अलंकृत करना हो तो मान्यवर आदरणीय, कुबेर देवता के समान, महान गणितीय हर दिल अजीज *जेठली* जी योग्य महापुरुष है😀मेरी ईश्वर से ये ही कामना है कि हमारे देश का वित्तमंत्री पद सुरछित कर दिया जाए और सरकार चाहे किसी भी पार्टी की आये पर वित्तमंत्री पूजनीय जेठली जी को ही बनाया जाए 😀

रिलायंस

*रिलायंस*➖
कई साल पहले की बात है। देश की एक आला कंपनी ने देशवासियों को कर लो दुनिया मुठ्ठी में का मंत्र दिया था। मंत्र को हमने न केवल स-हृदय स्वीकारा बल्कि स्वागत भी किया। फिर तो देश के प्रत्येक आमो-खास की मुठ्ठी में एक बे-तार का यंत्र नजर आने लगा। आलम यह था- जिस ओर निगाह दौड़ा दो, उस ओर कर लो दुनिया मुठ्ठी में के इश्तिहारों से दीवारें पटी पड़ी रहती थीं😀 बे-तार के उस यंत्र पर हम इस कदर ‘मोहित’ थे कि मोहल्ले के नुक्कड़ और गांव-देहात की चौपाल पर उसी की धुनें और चर्चाएं छाई रहती थीं।

सही मायनों में मोबाइल फोन के प्रति हमारे भीषण आकर्षण या कहें दीवानगी की शुरुआत यहीं से हुई थी।

करो लो दुनिया मुठ्ठी में से शुरू हुआ सफर फिलहाल फ्री-हैंडसेट पर आकर टिका है। लेकिन यह अंत नहीं है। अंत हो भी नहीं सकता क्योंकि इंसान की खोपड़ी हर पल कुछ न कुछ नया और अद्भूत चलता रहता है, और चले भी क्यूँ नही *खाली खोपड़ी शैतान का घर😀। देश में बाकी क्रांतियां का तो नहीं मालूम हां मगर ‘डिजिटल-क्रांति’ बहुत तेजी चल रही है। हर घर का तो छोड़िए हर व्यक्ति के हाथ में एक-दो मोबाइल फोन मिल जाना अब सामान्य-सी बात है।

वैसे तो आज की तारीख में लोगो के काम धन्दे है नही 😀फिर भी अपने काम-धंधों के बाद लोग कहीं और अगर व्यस्त रहते हैं तो अपने-अपने मोबाइल फोनों में ही। टच-स्क्रीन पर ऊंगलियां हर वक्त कुछ न कुछ या तो खोजती रहती हैं या फिर मैसेजिस लिखती रहती हैं। दीवानगी का आलम यह है कि राह चलते हुए भी लोगों ने अब निगाहें ऊपर कर चलना छोड़ दिया है। फेसबुक, टि्वटर, व्हाट्सएप हमारी जिंदगी के वो जरूरी हिस्से बन चुके हैं कि अब अपनों को इग्नोर करते जाना हमारी आदत में शामिल हो गया है। हममें से बहुत लोगों को शायद इसका गम न हो। रिश्तो से पियार मिले या ना मिले पर लाइक जरूर मिलना चाहिए 😀

हाल में, नहले पे दहला जियो ने अपने हैंडसैट को आंशिक फ्री कर दीवानगी का एक औ झुनझुना हमें थमा दिया है। मुफ्त डाटा बांटने की होड़ तो चल ही रही थी कंपनियों के बीच अब शायद मुफ्त के हैंडसेट बांटने का अभियान भी चल निकले😀

जो हो पर ग्राहक सर से लेकर पैर तक फायदे ही फायदे में है। कभी ऐसा समय भी था जब मात्र ‘हैलो’ कहने के ही दस रुपए झट्ट से कट जाया करते थे। अब वो समय है कि लोग एक-दूसरे से घंटों वीडियो चैट कर लेते हैं वो भी बहुत ही मामूली खर्चे में।

दुनिया जितनी तेजी के साथ डिजिटल हो रही है, उतनी ही तेजी से इंसानों के बीच नजदीकियां बिखर रही हैं। महीनों गुजर जाते हैं हमें एक-दूसरे से मिले या शक्लें देखे हुए। तो क्या...। मुफ्त का हैंडसेट और पर-डे वन जीबी डेटा है न दूरियों को नजदीकियों में बदलने के लिए!

शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

तलाक तलाक तलाक

तलाक तलाक तलाक ➖ लो साहब एक और पुरानी रिवायत तोड़ दी गयी, अब आप अपनी सगी बीवी को तीन तलाक नही दे सकते । हम मर्दो के पास बीवी को धमकाने ,और उनकी मेरठ की केंची की तराह तेज चलती जुबान पर रोक लगाने का एक ही जन्मसिद्ध अधिकार था ,वो भी गया हाथ से 😀 पहले कभी बीवी लड़ती थी तो उसे शांत करने के लिए बोल दिया करते थे ➖चुप हो जा वरना तलाक दे दूंगा😀 और वो भी शेरनी से पालतू गाय बन जाती थी 😀 अब हम निरीह मर्दो के पास एक ही हथ्यार था उसे भी कुंद कर दिया गया । मेरी सभी दोस्तों को सलाह है कि वो अपनी पत्नी का पूर्ण आदर करें 😀 उसकी हर जायज नाजायज डिमांड को पूरी करने में जी जान से जुट जाएं , और चाहे वो काली कलूटी हो पर उसकी तुलना जन्नत की हूर से करें 😀 लेकिन एक बात अब तक समझ मे नही आई जो लोग तलाक खत्म कराना चाहते थे उनमें कोई भी शादीशुदा नही है 😀 भाई आप कुंवारे हो आपको क्या पता शादीशुदा जिंदगी में असली पीड़ित कौन होता है 😀 किस पर जुल्म होता है और कौन मजलूम होता है 😀 अब गिला भी किस से करे जब मर्द ही मर्द का दुश्मन बन जाये तो क्या कर सकते है😃 योगी जी मोदी जी नोटबन्दी , मीटबन्दी, gst का सितम कम था जो एक और नर उत्पीड़न लागू कर दिया ।

स्त्री

समाज को हम किस ओर लिए जा रहे हैं यह हमें भी नहीं मालूम। बस चले जा रहे हैं। एक होड़ या कहूं एक जिद-सी है हमारे भीतर एक-दूसरे को ‘मात’ दे आगे निकल जाने की। आगे निकल जाने की यह घुड़-दौड़ हमसे कितना कुछ छीनती जा रही है, शायद हमें इसका अहसास भी नहीं। अगर अहसास हो तो भी हम उसे ‘महसूस’ नहीं करना चाहते।

हमारा समाज निरंतर ‘हिंसक’ और ‘वहशी’ बनते जाने को ‘अभिशप्त’ है। किसी का किसी को कोई ‘लिहाज’ नहीं। मन और शरीर के भीतर दबी कुंठाएं इस कदर बढ़ गई हैं कि उन्हें किसी भी तरह बाहर निकालना है। ऐसे कुंठित लोग यह भी नहीं देखते कि वे दैहिक शोषण स्त्री का कर रहे हैं या मासूम बच्चों का। खासकर, स्त्रियों के साथ शारीरिक, समाजिक, पारिवारिक शोषण की घटनाएं इतनी तादाद में सामने आने लगी हैं, कभी-कभी ऐसी खबरों को पढ़ और जानकर डर-सा लगता है। लगभग यही हाल हमारे मासूम बच्चों का भी है। बच्चों के प्रति शारीरिक दुराचार के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उनके भविष्य की चिंता सताने लगी है। जिन बच्चों में अपने कल व देश के सुनहरे भविष्य की उम्मीदें हम पालते हैं, उन्हीं का शोषण कर पौधे को बड़ा होने से पहले ही काटने पर तुले हैं हम।

हाल में गुरुग्राम के एक बड़े स्कूल में एक मासूम के साथ घटी दैहिक शोषण की घटना क्या हमारे कान नहीं खोलती? हेल्पर ने मासूम बच्चे का गला रेत डाला। दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे की उम्र ही कितनी होती है। उस मासूम को तो कुछ मालूम भी न होगा कि उसके साथ कितना ‘वहशी बर्ताब’ किया गया। फूल को खिलने से पहले ही उसे बेरहमी से तोड़ डाला गया। उक्त खबर पढ़कर ही हम भीतर से कितना हिल गए होंगे। लेकिन पूछिए जरा उस मासूम के मां-बाप से उनके दिलों पर क्या गुजरी होगी? उन्हें जीवन में मिला यह एक ऐसा ‘घाव’ है, जिसे अच्छे से अच्छा ‘मल्लम’ भी नहीं भर सकता। बेटे के न रहने के दर्द ने उनके पूरे जीवन का सुख-चैन छीन लिया।

ये कैसे यौन कुंठाओं से पीड़ित दरिंदे हैं, जिन्हें यह तक होश नहीं रहता कि वे मासूमों के साथ क्या गलत कर रहे हैं। यौन कुंठाओं की चरस का नशा उनके दिमाग पर कुछ तरह तारी रहता है कि वे यह भूल जाते हैं उनका किया कुकर्म किसी मासूम को हमेशा के लिए अंधेरे कुंए में भटकने को मजबूर कर सकता है। उन्हें अपनी ही आत्महत्या के लिए उकसा सकता है। उनसे उनकी सांसे छीन सकता है।

शायद ही ऐसा कोई दिन गुजरता हो जब हमारे समक्ष मासूम बच्चों के साथ यौन या मानसिक शोषण की खबरें न आती हों। अखबार या सोशल मीडिया पर आने वाली हर दूसरी खबर किसी न किसी बच्चे के देह-शोषण से जुड़ी होती है।

न केवल बाहर अपने घर-परिवार में भी बच्चे गाहे-बगाहे ऐसी घटनाओं से दो-चार होते रहते हैं। पता चलता है कि उनके ही परिवार के करीबी सदस्य उनका यौन तिरस्कार करते रहे। समाज में जाने कितनी ऐसी मासूम बच्चियां हैं जो अपने पिता, अपने भाई, अपने मामा-चाचा की गलत हरकतों का शिकार हो चुकी हैं। कुछ तो परिवार वालों के खौफ के चलते मुंह भी नहीं खोल पातीं।

पाप के इस खेल में कोई एक नहीं बल्कि जिम्मेदार हम सब हैं। वजहें बेशक अलग-अलग हो सकती हैं। धीरे-धीरे कर हम एक ऐसा समाज बनते जा रहे हैं जहां यौन कुंठाएं इस कदर हमारे दिलो-दिमाग पर हावी होती जा हैं कि हम इसके अतिरिक्त न कुछ देखना चाहते हैं न समझना। पता नहीं हमारे जिस्म की यह कैसी भूख है, जो बड़ी ही बेरहमी और बेशर्मी के साथ मासूमों को अपना निवाला बनाने से नहीं रोक पा रही।

पैसे, नौकरी और सोशल मीडिया की भेड़चाल में लिप्त मां-बापों के पास समय ही नहीं अपने बच्चों के साथ बीताने को। उसका खामियाजा किसी न किसी रूप में हमारे बच्चों को झेलना पड़ रहा है। दुख होता है, अपने मासूम बच्चों को यों किसी वहशी की यौनिकता का शिकार होता देख।

ऐसे यौन पिपासुओं के विरूद्ध इतने सख्त कानून बनाएं जाएं कि वे तो क्या कोई भी मासूम बच्चों या स्त्रियों के साथ गलत हरकत करने की सोच तक नहीं। पता नहीं वो दिन कब आएगा?

किसानों का कर्जा माफ

*किसानों का कर्जा माफ*➖➖ इसे कहते है *जैसी कथनी वैसी करनी* कौन कहता है जुमलेबाज़ों की सरकार है❓मेरे सामने तो लाओ😀 प्रधान सेवक ने एलान किया किसानों का कर्ज माफ होगा , लो जी कर दिया कर्ज माफ ❗विरोधी अब भी कलेजा पीट रहे है ,खामिया निकाल रहे है , उन बड़बुको को कौन समझाए कि *भाई कर्जे माफी की बात हुवी थी , रकम की नही के कितना माफ करेंगे*😀  9 पैसे से लेकर 377 रुपये तक कि भारी भरकम राशि माफ की है 😀 *उम्मीद है के अब किसान आत्महत्या नही करेंगे*😀 जैसी दरियादिली हमने किसानों के साथ दिखाई है , वादा करते है आपसे हर छेत्र में ऐसी ही दरियादिली आपको आने वाले समय मे देखने को मिलेगी ।भाइयो और बहनों आप  लोगो को विकास की आंधी दिखाई नही दे रही क्या ❓ मित्रो पेट्रोल 60 रुपये लीटर था हमने आपके सहयोग से आज 80 रुपये लीटर कर दिया 😀 गैस का सिलेंडर 448 रुपये का था ,अब 777 रुपये का है , क्या ये विकास कम है ,और कितना विकास करें 😀 टमाटर 150 किलो बिकवा दिया अब मित्रो आप ही बताओ और कितना विकास करें 😀आशु मलिक